
बुनियाद अभियान क्या है?
हर निर्माण की शुरुआत मजबूत बुनियाद से होती है। बुनियाद पर ही सपने और उम्मीदें टिकती हैं। बुनियाद एक इमारत को सहारा देती है, उसे आकार देती है और मजबूत बनाती है। जितनी मजबूत बुनियाद, उतनी मजबूत इमारत। ठीक वैसे ही, किसी देश की ताकत उसकी मजबूत बुनियाद से होती है।
हम वह 'बुनियाद' हैं, जिससे हर निर्माण की शुरुआत होती है।
बुनियाद अभियान ईंट भट्ठा मालिकों, वहाँ काम करने वाले कामगारों, उनके संगठनों और सरकार को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि सब मिलकर ऐसी नीतियाँ और समाधान तैयार करें, जिनसे ईंट भट्ठा उद्योग में पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ नई और बेहतर तकनीक का इस्तेमाल हो सके।
साथ ही, मज़दूरों को कार्यस्थल पर सम्मान और एक सुरक्षित माहौल मिले, ताकि ईंट निर्माण उद्योग और इससे जुड़े लोगों का जीवन और भी बेहतर, संपन्न और खुशहाल बन सके।
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हमारे उद्देश्य
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बुनियाद अभियान ईंट भट्ठा उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने की कोशिश करता है, ताकि साथ मिलकर इस क्षेत्र में सुधार और सकारात्मक बदलाव हो सकें।
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हमारा लक्ष्य है – स्वच्छ, न्यायसंगत नीतियों और तकनीकी बदलाव की ऐसी कार्य योजना तैयार करना, जो पर्यावरण मानकों और सामाजिक जिम्मेदारियों को और मजबूत बनाए।
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बुनियाद अभियान ईंट भट्ठा उद्योग में नई तकनीक और स्वच्छ ईंधन को आसान और उपयोगी बनाना चाहता है।
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ईंट भट्ठा उद्योग में तकनीकी बदलाव को न्यायसंगत बनाने के लिए सुनिश्चित करना कि इस उद्योग से जुड़े कामगारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, और नए कौशल सीखना का अवसर मिले, ताकि वे नई तकनीकों के साथ आसानी से काम कर सकें।
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बुनियाद अभियान ईंट भट्ठा मालिकों को वित्तीय मदद दिलवाने के लिए भी प्रयासरत है, ताकि वो नए उपयोगों और बदलावों के साथ काम कर सकें।
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हम कला और संस्कृति के ज़रिए इस अभियान से आम लोगों को भी जोड़ना चाहते हैं।
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बुनियाद अभियान का यह लक्ष्य है कि ईंट भट्ठा उद्योग में तकनीकी बदलाव से स्थानीय लोगों को भी सीधा फायदा हो।

उड़ान फेलोशिप –
चंबल अकादमी की
एक पहल

चंबल अकादमी द्वारा शुरू की गई उड़ान फेलोशिप एक सामाजिक और जलवायु न्याय से जुड़ी पहल है, जिसका उद्देश्य ईंट भट्ठा उद्योग में काम करने वाली महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना है। यह पाँच महीने की फेलोशिप, महिलाओं को स्टोरीमेकर यानी कहानीकार बनने और अपने जलवायु से जुड़े अनुभवों व पहलुओं को साझा करने का मंच प्रदान करती है।
फेलोशिप के तहत उत्तर प्रदेश के भीतरी इलाकों में 15 महिलाएं व लड़कियां ईंट भट्ठा उद्योग से जुड़े परिवारों की ज़मीनी कहानियों को इकट्ठा कर रही हैं और जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीतियों पर जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।
यह कार्यक्रम महिलाओं की आवाज़ को आगे लाने और क्लाइमेट जस्टिस के मुद्दों को मजबूती देने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर, आईआईटी कानपुर
गैलरी
बुनियाद x
चंबल मीडिया
हम बुनियाद अभियान के अंतर्गत देश की प्रतिष्ठित संस्था खबर लहरिया के साथ साझा प्रयास कर रहे हैं। खबर लहरिया के साथ हम ईंट भट्ठा मजदूरों और गैर श्रमिक वर्ग की वस्तुस्थिति बताने की कोशिश कर रहे हैं। हम उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा उद्योग में, न्यायोचित बदलाव से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण से सम्बंधित कहानियों को सार्वजनिक मंच पर लेकर आएंगे।






































![Kya aapne socha, iss film ka naam “Ojhal” kyun hai?
Brick kilns ko hum aksar door se dekhte hain: dhuaan, bhattiyan, eent ke dher. Lekin inn sabke beech kaun si zindagiyan hain, kaun si kahaniyan hain?
Ojhal unhi brick kiln workers ki zindagiyon ke kareeb jaane ki ek koshish hai: unki realities, experiences aur aspirations ko dekhne aur samajhne ki.
Kyunki kuch kahaniyan humare saamne hote hue bhi nazar se ojhal reh jaati hain.
#MakingOfOjhal
#inth #explore #eenth #fyp
[film, experimental documentary, inth, bhatte, brick kilns, Brick kiln workers in India, Uttar Pradesh]](https://instagram.ftlv23-1.fna.fbcdn.net/v/t51.82787-15/786916053_17903921943475027_7419218414206703687_n.jpg?stp=dst-jpg_e35_tt6&_nc_cat=100&ccb=7-5&_nc_sid=18de74&efg=eyJlZmdfdGFnIjoiRkVFRC5iZXN0X2ltYWdlX3VybGdlbi5DMyJ9&_nc_ohc=TnUAmgRV3xUQ7kNvwFj0UON&_nc_oc=AdrJNQvIqCZ1E2pcxOM2AQ2tjyU89-wPkEcS7E0SNxDfVjLHuFAV5-BGn3xp3wBH6Fk&_nc_zt=23&_nc_ht=instagram.ftlv23-1.fna&edm=ANo9K5cEAAAA&_nc_gid=zdKR5trVUS1Uy-NsU1Lx0w&_nc_tpa=Q5bMBQIgofoPgqXIqXCp_qKx1893IGJACURTZjNJaVrS_xvOyRc3lLL5UsVflNJ2LFHH1_hOapGUVaSC&oh=00_AQIBBP_5QqN_RgnDlM1cEY_pR5oA_calgpjNtE2DPoetGg&oe=6AA004F6)
