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उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठा उद्योग के उत्थान और विकास हेतु मांग पत्र

नमस्ते, हम उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा कामगार और मालिक हैं। लोग कहते हैं हम ईंटें बनाते हैं, पर अगर गौर करें तो हम उम्मीदें गढ़ते हैं। हमारे हाथों से बनी हर एक ईंट हमारी मेहनत, लगन, कारीगरी और सपनों का एक टुकड़ा है। हम और हमारे जैसे हज़ारों ईंट-भट्ठा मालिक व इस उद्योग से जुड़े दो करोड़ से भी अधिक कामगार दशकों से वह नींव गढ़ रहे हैं, जो आपके भविष्य, समाज और देश का सहारा है तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आजीविका का आधार। 


हमने वो ईंटें गढ़ीं जो आपके घरों की दीवारों में लगी है, जो स्कूलों, अस्पतालों, पुलों, दुकानों,  और दफ़्तरों आदि में लगी है और आज सबको एक बेहतर जीवन और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।


आज उत्तर प्रदेश का हर नागरिक, चाहे वह युवा हो या बुजुर्ग, शहरी हो या ग्रामीण - स्वच्छ हवा, स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य की कामना करता है। इसके लिए ज़रूरी है कि ईंट-भट्ठा उद्योग बदलते समय के साथ स्वच्छ और टिकाऊ तकनीकें अपनाए, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहे और कामगारों के कल्याण और जीवन स्तर में सुधार हो। 


हमारे, आपके और पूरे प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए यह बदलाव आवश्यक है। ऊर्जा-सक्षम तकनीक, स्वच्छ ईंधन, बेहतर डिज़ाइन और प्रबंधन से न केवल ईंट की गुणवत्ता सुधरेगी और लागत घटेगी, बल्कि कामगारों की सुरक्षा बढ़ेगी और सबसे अहम, शहरों एवं गांवों में प्रदूषण कम होगा। 


इसलिए हम, ईंट भट्टा उद्योग संघों, श्रमिक संगठनों, तकनीकी विशेषज्ञों, बायो-कोल उत्पादकों और नागरिक समाज संगठन ‘बुनियाद’ अभियान के तहत, आपसे इस बदलाव में सहयोग की अपील करते हैं।


इस याचिका का उद्देश्य है ईंट भट्ठा उद्योग को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और जिम्मेदार बनाना - ताकि कामगारों का परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सके, आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ़ हवा, हरित वातावरण और बेहतर भविष्य सुनिश्चित हो सके।


आपका सहयोग साबित करता है कि उत्तर प्रदेश में ईंट-भट्ठा उद्योग से जुड़े लाखों लोग अलग-थलग नहीं, बल्कि सबके साथ मिलकर स्वच्छ हवा के लिए प्रयासरत हैं, और आप हमारे इस संकल्प को समझते हुए हमारे साथ खड़े हैं।

हमारी प्रमुख मांगे हैं:

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उद्योग को बदलने के लिए सहयोग

  1. न्यायसंगत तकनीकी परिवर्तन के लिए राज्य स्तरीय टास्क फोर्स: श्रमिकों, भट्ठा मालिकों, सरकार और विशेषज्ञों के प्रतिनिधित्व के साथ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और श्रम विभाग के तहत एक समर्पित टास्क फोर्स बनाई जाए।
     

  2. वैकल्पिक ईंधन साधनों का विकास और उनका प्रचार: जैव ईंधन (Bio‑Fuel) पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए और हर जिले में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत सप्लाई चेन बनाई जाए।
     

  3. ईंट उद्योग में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की ओर समग्र बदलाव: ईंट भट्ठा उद्योग में स्वच्छ ऊर्जा को केवल ईंधन व फायरिंग तकनीक तक सीमित न रखकर, सभी ऑन-साइट कार्यों और सप्लाई चेन स्तर पर अपनाना आवश्यक है।
     

  4. सरल लाइसेंसिंग व्यवस्था: जैसे प्रदेश सरकार के अभिनव प्रयास “निवेश मित्र” के ज़रिए कारोबारियों को सुविधा मिल रही है, वैसे ही ईंट भट्ठों के लिए भी एक आसान और पारदर्शी सिंगल विंडो प्रणाली बने, जिसमें लाइसेंस कम से कम तीन साल के लिए मान्य हों।
     

  5. मौसम से सुरक्षा: बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान के लिए आर्थिक सुरक्षा तंत्र बने (किसानों के मुआवजे की तर्ज पर) ताकि मालिक और कामगार दोनों के हित सुरक्षित रहें।
     

  6. नई तकनीक के लिए ऋण और सब्सिडी: स्वच्छ, ऊर्जा‑दक्ष तकनीकों में परिवर्तन हेतु सुलभ ऋण/सब्सिडी उपलब्ध कराई जाए; ईंट उद्योग को सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (MSME) के अंतर्गत वित्तीय सुविधाएं मिलें।

पर्यावरण और हमारे शहरों को साफ हवा

  1. ग्रीन बेल्ट का विकास: ईंट भट्ठों के आसपास हरित आवरण / पेड़ों की अनिवार्यता हो, ताकि स्थानीय हवा स्वच्छ रहे और धूल‑धुएं का प्रभाव घटे।
     

  2. हीट‑वेव से सुरक्षा: प्रचंड गर्मी के मौसम में कार्यस्थलों पर शेड, पेयजल, प्राथमिक उपचार और विश्राम स्थल की व्यवस्था अनिवार्य हो।
     

  3. पर्यावरणीय निगरानी: भट्ठों पर नियमित अंतराल में प्रदूषण जांच और निगरानी तंत्र हो, ताकि उद्योग और समाज दोनों पर्यावरणीय मानकों का पालन कर सकें।

श्रमिकों का जीवन और गरिमा

  1. स्वास्थ्य और पोषण: महिला कामगारों और बच्चों तक सरकारी स्वास्थ्य व पोषण से जुड़ी योजनाएँ पहुँचें; हर महिला श्रमिक को यूनिवर्सल हेल्थ कार्ड, गर्भावस्था कार्ड और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए; बच्चों के टीकाकरण और पोषण की गारंटी हो।
     

  2. सभी कामगारों का पंजीकरण: स्थानीय और प्रवासी दोनों तरह के कामगारों का BOCW अधिनियम के तहत पंजीकरण हो, ताकि वे सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले सकें।
     

  3. सुरक्षित आवास व स्वच्छता: भट्टों पर कामगारों के लिए आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित हो, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग शौचालय व स्नानागार उपलब्ध हों।
     

  4. शिक्षा का अधिकार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति व शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत, श्रमिक‑विशेषकर प्रवासी‑बच्चों को मध्य‑सत्र में भी प्रवेश और शुल्क‑माफी मिले।
     

  5. सीधे अनुबंध और पारदर्शिता: मालिक-कामगार के बीच प्रत्यक्ष अनुबंध हो ताकि ठेकेदारों की मनमानी घटे और कामगारों को समय पर पूरा पारिश्रमिक मिले।
     

  6. मातृत्व अधिकार और सम्मान: गर्भवती महिलाओं को मातृत्व अवकाश और संबंधित सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ सुनिश्चित हो।
     

  7. कौशल विकास: स्किल इंडिया मिशन के अंतर्गत ईंट भट्ठा उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम एवं भट्ठा मालिकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को अनिवार्य बनाया जाए।

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यदि आप ऊपर दिए गए सभी सुझावों से सहमत हैं तो कृपया निम्नलिखित कॉलम को भर के सबमिट करें

मैं / हम समर्थन करते हैं :

  • मैं / हम उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठों के डिकार्बोनाइज़ेशन और स्वच्छ तकनीकों के अपनाने का समर्थन करता /करती हूं / करते हैं।

 

  • मैं / हम बुनियाद अभियान द्वारा शुरू की गई उपर्युक्त मांगों का समर्थन करता / करती हूँ / करते हैं और राज्य सरकार व संबंधित विभागों से तात्कालिक कार्यवाही का आग्रह करता / करती हूं / करते हैं।
     

  • मैं / हम श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन का समर्थन करता / करती हूं / करते हैं।

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